सवाईमाधोपुर. सरकारी विद्यालयों के नौनिहालों को स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से इन दिनों स्कूलों में बांटी जा रही खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवालिया निशान उठ रहे हैं। इस सामान के बिल में जो सामान की रेट लगाई गई है वो ब्रांडेड सामान की रेटों से भी अधिक है लेकिन हकीकत में समान की गुणवत्ता लोकल बाजार में मिलने वाले सामान से भी घटिया बताई जा रही है। ऐसे में सत्र के समापन पर आई यह खेल सामग्री किस प्रकार नौनिहालों को खिलाड़ी बना पाएगी।
जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से स्कूलों में खेल सामग्री खरीद के लिए बजट का निर्धारण किया हुआ है। इसमें प्राथमिक विद्यालय में 5 हजार, उच्च प्राथमिक विद्यालय में 10 हजार और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 25 हजार रुपए की खेल सामग्री आई है। जिले की स्कूलों को इन किटों का वितरण किया गया है। इसके बाद से संस्था प्रधानों में इन किटों को लेकर असंतोष पनप रहा है। शारीरिक शिक्षक संघ शिक्षा विभाग की इस पहल का विरोध जता रहे हैं और ज्ञापन दे रहे है। उनका कहना है कि सत्र लगभग समाप्त हो चुका है और अब सरकार और विभाग की ओर से परीक्षा के समय खेल का सामान भेजा गया। इसकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है और उपयोगी भी नहीं है। एक तरफ शिक्षा विभाग सभी योजनाओं का पैसा डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी या स्कूलों के खाते में डालता है, फिर खेल सामग्री का पैसा स्कूल खातों में न डालकर अनुपयोगी खेल सामग्री को स्कूलों पर थोप कर क्या हासिल करना चाहता है।
घटिया खेल सामग्री का किया विरोध
शिक्षा परिषद राजस्थान से प्रदेश के विद्यालय में सप्लाई की जाने वाली घटिया खेल सामग्री के विरोध में राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष करणफूल मीणा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें सप्लाई किए गए सामान की घटिया गुणवत्ता, किट बैगों में कम सामग्री एवं प्रदेश भर के विद्यालयों में एक समान खेल किट प्रदान करने का विरोध किया। शारीरिक शिक्षको ने सप्लाई की गई खेलकूद सामग्री की गुणवत्ता को घटिया बताया है।
शारीरिक शिक्षकों ने यह लगाए आरोप
राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के भागचंद सैनी, कमलेश गुर्जर, राकेश उपाध्याय, मोहनलाल शर्मा, हंसराज मीणा, शिवराम गुर्जर आदि ने बताया कि सरकार से बजट का किस तरीके से दुरुपयोग किया है इसका उदाहरण देते हुए बताया की जो मेडिकल किट दी गई है जिसकी कीमत लगभग एक हजार रुपए प्रति बैग है, इसकी आवश्यकता ही नहीं थी, क्योंकि प्रत्येक सरकारी अस्पताल से वह प्राथमिक उपचार की सामग्री फ्री मिल जाती है। दूसरा शारीरिक शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सप्लाई करने वाली फर्म से 12 माह की जो वारंटी पत्र लिया है, उसमें खराब होने वाली खेल सामग्री को फर्म किस तरीके से ठीक करवाएगी। एइसके अतिरिक्त जो खेल सामग्री परिषद से प्राप्त हुई है उसमें बहुत सारे विभाग से संचालित खेलों से संबंधित कोई सामग्री नहीं दी गई है,जबकि परिषद के स्तर पर दक्ष शारीरिक शिक्षकों की एक कमेटी का गठन होना चाहिए था, जो खेल सामग्री के संदर्भ में परिषद को सुझाव उपलब्ध करवाते तथा परिषद को यदि सामग्री ही भिजवानी थी तो प्रत्येक विद्यालय से मांग लेनी थी।
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इनका कहना है...
स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से स्कूलों में भेजी गई खेल सामग्री की किट न तो गुणवत्तापूर्ण है और न ही स्कूलों की मांग के अनुरूप है। विभाग को विद्यालयों की मांग के अनुसार उन्हें सीधे बजट का आवंटन करना था, जिससे वो अपने स्कूलों में आवश्यकता के अनुरूप सामग्री की खरीद कर सकें। स्कूलों को भेजी गई खेल सामग्री किट के सम्बन्ध में शारीरिक शिक्षा संघ की ओर से विरोध किया। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।
करणफूल मीणा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान शारीरिक शिक्षक संघ।