बिहार में 17% मुस्लिम आबादी और 47 मुस्लिम-बहुल सीटों के बावजूद, नीतीश कुमार का मुस्लिम वोट बैंक कमजोर होता जा रहा है। 2020 के चुनाव में सिर्फ 5% मुस्लिम वोट NDA को मिले, जबकि 76% ने महागठबंधन को चुना। 2024 में JDU का मुस्लिम उम्मीदवार किशनगंज से 59,000 वोटों से हार गया। नीतीश ने पहले पसमांदा मुसलमानों को अलग करके सोशल इंजीनियरिंग की थी, लेकिन अब मुस्लिम वोटों के घटते समर्थन के कारण वे वक्फ बिल का विरोध कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान और नीतीश की "बीजेपी के साथ रहेंगे" की घोषणा से साफ है कि वे हिंदू वोटों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। बिहार में NDA का नेतृत्व बनाए रखने के लिए नीतीश अब मुस्लिम-विरोधी रुख अपना रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू, जो पहले गठबंधन राजनीति के माहिर माने जाते थे, अब बीजेपी के साथ मजबूती से खड़े हैं। 2024 में बीजेपी के साथ गठबंधन करके उन्होंने आंध्र प्रदेश में सत्ता हासिल की और 16 लोकसभा सीटें जीतीं। आंध्र में सिर्फ 7.5% मुस्लिम आबादी है, और नायडू ने हाल में इफ्तार पार्टियों में मुस्लिमों को आश्वासन दिया कि वक्फ़ बिल उनके हित में है। उन्होंने कहा कि TDP हमेशा वक्फ़ संपत्तियों की रक्षा करेगी, लेकिन साथ ही वे बिल का समर्थन करते हैं। माना जा रहा है कि नायडू पवन कल्याण की बढ़ती लोकप्रियता और हिंदू वोटों को ध्यान में रखकर यह रुख अपना रहे हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी छवि सिर्फ मुस्लिम नेता की बने। यही वजह है कि वे नीतीश कुमार की तरह बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं।