समस्तीपुर ( बिहार ) : बिहार के समस्तीपुर जिले के मूर्तिकार लगातार अपना पुश्तैनी धंधा बंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस धंधे में मुनाफा नहीं है। 2 फरवरी को सरस्वती पूजा है। कुम्हार समाज के लोग सरस्वती प्रतिमा का निर्माण करना शुरू कर चुके हैं लेकिन प्रतिमाओं की बुकिंग नहीं हो रही है। मूर्तिकार पप्पू पंडित बताते हैं कि वह पिछले 20 सालों से मूर्तियों का निर्माण करते हैं। पहले सरस्वती पूजा को लेकर उत्साह होता था लेकिन अब वैसा माहौल नहीं है। फिर भी वो मूर्तियां बनाना शुरू कर चुके हैं। स्नातक के छात्र अनीश कुमार ने बताया कि पूजा के मौके पर बुकिंग मिलती है जिस कारण वह अपने माता-पिता का हाथ बंटाने के लिए घर आए हुए हैं लेकिन अब यह धंधा घाटे में है । वह इस धंधे में अपना भविष्य नहीं देखेंगे। मूर्तिकार बताते हैं कि 2 से 3 फीट की मूर्ति बनाने में कम से कम 500 का खर्च आता है लेकिन उक्त मूर्ति की कीमत 700 से 800 तक मिलता है। समस्तीपुर जिले के 20 प्रखंडों के करीब 80 गांव में कुम्हार प्रजापति समाज के करीब 3 लाख से अधिक की आबादी है इस समाज के ज्यादातर लोग मूर्ति कला के रोजगार से ही जुड़े हुए हैं लेकिन बढ़ती इस महंगाई में उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब है। बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार पंडित बताते हैं कि बिहार लघु उद्यमी योजना से प्रजापति समाज को वंचित रखा गया है। इस योजना के तहत कारोबार के लिए 2 से 10 लाख रुपए तक की राशि मिलती है। जिसमें आधी राशि सब्सिडी की होती है अगर मूर्ति कला को भी इस योजना के साथ जोड़ा जाता तो कुम्हार प्रजापति समाज के लोगों को बहुत हद तक आर्थिक लाभ मिलता।
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