खादी के कपड़े को बुनकर तैयार करने के लिए बना महात्मा गांधी का चरखा आज भी बाड़मेर के गांवों में ग्रामीणों के जीवनयापन का एक जरिया बना हुआ है। हालांकि काम के बदले पैसा काफी कम मिलता है। बावजूद इसके गांधी के सपने को ग्रामीण जीवंत कर रहे हैं। हाथ से चलने वाला पम्परागत चरखा