#Lockdown का सबसे ज़्यादा असर दिहाड़ी मज़दूरों पर हुआ. तब कोरोना के कारण रोजमर्रा के काम काम हो गए थे, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद तो काम मिलना बिलकुल बंद हो गया. जबकि #Dailywageworkers का एक बड़ा तबका रोजाना कमाता है और उसी कमाई से उसका घर चलता है. काम ठप होने के बाद कुछ मज़दूर अपने घर पैदल चले गए तो कुछ जैसे तैसे शहर में रह पाए. जो रह गए उन पर किराये का कर्ज हो गया.
बुधवार को लॉकडाउन की घोषणा का एक साल हो गया है. ऐसे में न्यूजलॉन्ड्री #Noida के हरौला मार्केट स्थित लेवर चौक पहुंचा और वहां काम की तलाश में आने वाले मज़दूरों से बात की. यहां मज़दूरों ने बताया, ‘‘इस लेबर चौक पर पहले सैकड़ों की संख्या में मज़दूर काम की तलाश में आते थे. काम देने वालों की संख्या काफी होती थी. ज़्यादातर लोगों को काम मिल जाता था लेकिन अब महीने में 10 दिन काम भी मिलना मुश्किल हो गया है. लॉकडाउन ने हमें बर्बाद कर दिया है.’’
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