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कद्दावर कांग्रेस नेता इंदिरा हृदयेश की खास बातें II देखिए कैसा रहा सियासी सफर ?

2021-06-13 14 Dailymotion

उत्तराखंड की सियासत में एक सदी का अंत !
इंदिरा हृदयेश के निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर !
इंदिरा हृदयेश कैसे बने सियासत में ‘दीदी’?
कांग्रेस नेता इंदिरा हृदयेश की 5 खास बातें !
सियासत में हर दिल अजीज कैसे बनी इंदिरा हृदयेश ?
क्यों सत्तापक्ष और विपक्ष सब नेता लेते थे इंदिरा से सलाह ?
आइए एक नजर डालते हैं इंदिरा ह्रदयेश के सियासी सफर पर

उत्तराखंड कांग्रेस की दिग्गज राजनेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का आज निधन हो गया…उन्होंने दिल्ली के उत्तराखंड सदन में अंतिम सांसें ली…डॉ. हृदयेश का निधन हार्ट अटैक की वजह से हुआ…दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की बैठक में भाग लेने के लिए वो शनिवार को राजधानी पहुंची थीं…आज उत्तराखंड सदन के कमरा नंबर 303 में उनकी हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई… इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है… इंदिरा हृदयेश एक ऐसी शख्सियत थीं जिनसे लोग सीख लेते थे और उनकी मिसाल देते थे…यूपी से अलग होकर बने उत्तराखंड में पिछले दो दशकों से कांग्रेस पार्टी का प्रमुख चेहरा रहीं, डॉ. इंदिरा हृदयेश राज्य में विपक्ष की कद्दावर नेता थीं…धीर-गंभीर अंदाज और राजनीतिक परिपक्वता की वजह से विपक्षी नेता भी उनका सम्मान करते थे…2016 में जब उत्तराखंड कांग्रेस में बगावत हो गई थी और पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल समेत 10 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे…तब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था…ऐसे समय में हरीश रावत की सरकार के साथ जो नेता लोहे की दीवार की तरह खड़ी रही थीं, वो थीं इंदिरा हृदयेश…कई मौके ऐसे आए जब राजनीतिक तौर पर हरीश रावत और इंदिरा हृदयेश के बीच मतभेद दिखे, लेकिन संकट के समय हृदयेश ने रावत का साथ नहीं छोड़ा…उम्र के इस पड़ाव में इंदिरा हृदयेश पिछले कुछ समय से लगातार बीमार चल रही थीं…कुछ दिनों पहले दिल्ली से इलाज कराकर लौटीं…उन्होंने कोविड को भी हराया था…पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी के दौर में राजनीति को जीने वाली स्वर्गीय हृदयेश का कद ऐसा था कि 20 साल की उम्र वाले उत्तराखंड राज्य में वो नेताओं और विधायकों के बीच 'दीदी' के नाम से पॉपुलर थीं…क्या कांग्रेस, क्या भाजपा, दीदी के पास सभी सलाह-मशविरा करने आते थे…बतौर नेता विपक्ष और संसदीय कार्यमंत्री स्वर्गीय हृदयेश की बातों की काट ढूंढना मुश्किल था…संसदीय मामलों में बीजेपी के नेता भी उनसे सलाह करते थे… उनको याद करते हुए पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने बताया कि स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश पहली व्यक्ति थीं, जिन्होंने उनको राजनीति में आने की सलाह दी थी, जब उनके पिताजी और यूपी के पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन हो गया था…1974 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बतौर शिक्षक नेता चुन कर पहुंचीं इंदिरा हृदयेश अक्सर कहती थीं, राजनीति में सम्बन्ध ही सब कुछ हैं…विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन मनमुटाव के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं है…1941 में कुमायूं के ब्राह्मण परिवार में जन्मी स्वर्गीय हृदयेश उत्तर प्रदेश विधान परिषद में लगातार मेंबर रहीं…जब 2000 में यूपी से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना, तब वो विपक्ष की नेता रहीं…2002 चुनाव में वो हल्द्वानी से चुनकर विधानसभा में पहुंचीं और नारायण दत्त तिवारी की सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री के तौर पर उभरकर सामने आईं… PWD मंत्री के तौर पर उन्होंने पहचान छोड़ी…2022 में होने वाले चुनावों के लिए वो काफी सक्रिय थीं…दो दिन पहले कांग्रेस के तेल की बढ़ती कीमतों के विरोध में हुए प्रदर्शन क