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क्या मूर्तिपूजा उचित है?:श्री कल्कि का विश्लेषण! kya Murti Puja Uchit Hai ?:Kalki Ka Vishleshan

2021-02-02 2 Dailymotion

आदरणीय मित्रो,
मैं स्वामी धर्मदास उदासीन आप सबका Dharm bodh
में अभिनन्दन करता हूं। इस बार वीडियो में मैंने बताया है कि मूर्तिपूजा ,प्रतीक उपासना कहां तक उचित है ।
गणतंत्र दिवस पर हमने राष्ट्रीय झंडा फहराया,उसे सालमी दी। क्या उस तिरंगे कपड़े ko salami दी ? नहीं,राष्ट्र को सलामी दी।
हम जो बोलते हैं,स्वर निराकार है लेकिन उस निराकार स्वर को याद रखने के लिए लिपि का , लकीरों का उपयोग किया जाता है। ये लीपियां भी मूर्ति है,प्रतीक हैं।
सनातन में दो तरह की मूर्तियों को चलन है,एक ऐतिहासिक मूर्ति ,दूसरा गुण - तत्व की मूर्ति प्रतीक।
श्री राम ऐतिहासिक हैं तथा श्री गणेश गुण तत्व के प्रतीक हैं। गणेश की सवारी चूहा,लक्ष्मी की सवारी उल्लू आदि ये सब क्या है ! ये प्रतीकों का विज्ञान है। इसे ठीक से समझने की जरूरत है।
मूर्ति -,प्रतीक के बिना मानवी सभ्यता का विकास ही संभव नहीं।
हां,मूर्तिपूजा में कहीं कहीं अतिवाद दिखता है,जो उचित नहीं।
धन्यवाद।


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