उत्तरपूर्वी दिल्ली का सांप्रदायिक हिंसा सैकड़ों ज़िंदगियों की तबाही का सबब बन गया है. हंसते-खेलते परिवारों में अब ख़ुशी की बजाय ग़म और मातम का माहौल पसरा है. ऐसा ही एक परिवार हिंसा प्रभावित खजूरी ख़ास की श्री राम कॉलोनी में तहसीना का है जिनका 34 साल का बेटा दंगे में क़त्ल कर दिया गया.
बब्बू पेशे से ऑटो ड्राइवर थे जिनके तीन बच्चे हैं. काम से लौटने के बाद बच्चों की देखरेख बब्बू ही करते थे क्योंकि उनकी बीवी न बोल, सुन नहीं सकती है और न ही चल सकती हैं। किराए के एक कमरे में बसा यह परिवार पूरी तरह बिखर चुका है. बब्बू के गुज़र जाने के बाद उनके परिवार का हाल कैसा है, उनकी मां तहसीना से बात की गोन्यूज़ संवाददाता राहुल गौतम ने.
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