मृत्यु एक सार्वभौमिक सत्य है, और इस सत्य को झुठलाया नही जा सकता, हमारे भौतिक शरीर की मृत्यु के पश्चात वह बेजान और निष्क्रिय होकर विघटित होने लगता है, तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि,उस भौतिक शरीर में ऐसी क्या परम शक्ति विद्यमान थी जो उस शरीर को चला रही थी अथवा गतिमान कर रही थी? अगर इस स्थुल शरीर के अंदर वह परम शक्ति जिसे हम जीवात्मा कहते है तो आखिर इस भौतिक शरीर की मृत्यु के बाद वह कहाँ और किस लोक में जाकर निवास करती है? क्या वास्तव में ऐसा कोई लोक होगा? अगर हाँ! तो उस लोक का स्वरूप कैसा होगा ? उस लोक अथवा जगत का नियंत्रक कौन होगा ? ऐसे ही कुछ अनंत प्रश्न है, जो आज भी रहस्य बने हुए है। मृत्यु के पश्चात जीवात्मा की क्या स्थिति होती है, जीवात्मा कहाँ जाती है, इस रहस्य को एक अलग नजीरिये से जानने के लिए इस वीडियो को पूरा सुने।
वास्तव में मृत्यु प्रकृति द्वारा प्रदान की गई एक विधि अथवा व्यवस्था है, जिसके द्वारा संसार की लीला को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस विधि द्वारा मनुष्य अपनी तरंग बढ़ा पता है तथा सूक्ष्म जगत में अभिव्यक्ति कर पता है। वास्तविकता तो यह है कि स्थूल शरीर की मृत्यु, सूक्ष्म शरीर प्राप्त करने की एक विधि है मगर यह विधि ही लोगों के दुःख का कारण बन गयी है। मनुष्य को पृथ्वी पर मृत्यु देखकर दुःखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि आगे की यात्रा इसी जीवन का विस्तार है।
यह बात भी पता होनी चाहिए की भावनाओ के लिए समय और काल कोई मायने नहीं रखता, भावनायें सहजता से पृथ्वी के इस भौतिक जीवन से मृत्यु उपरान्त उस सूक्ष्म जगत में आसानी से पहुँच जाती हैं। जब मनुष्य को यह बात स्पष्ट हो जायेगी तब वह अपनी दुःखद भावनाओं पर नियंत्रण रख पायेगा और अपने मृतक रिश्तेदार के लिए सकारात्मक भावनाये ही रखेगा।
मनुष्य पृथ्वी पर इस भौतिक जीवन को जीने के लिए थोड़े समय के लिए ही आया है, यह बात वो भूल चूका है। इसलिए इस भौतिक जीवन अथवा स्थूल शरीर की मृत्यु को सही समझ के साथ जानकारी प्राप्त होने के पश्चात वह मृत्यु उपरान्त सूक्ष्म जगत के जीवन में जाने क लिए जो गुण विकसित करेगा, वे गुण उसके पृथ्वी पर के भौतिक जीवन को भी सुन्दर बना देंगे।
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धन्यवाद।