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गिरना शुभ क्योंकि चोट बुलावा है ॥ आचार्य प्रशांत, श्री अष्टावक्र पर (2014)

2019-11-27 2 Dailymotion

वीडियो जानकारी:

शब्दयोग सत्संग
२२ अक्टूबर २०१४,
अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा

अष्टावक्र गीता (अध्याय ३, श्लोक ५)
सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
मुनेर्जानत आश्र्चर्यं ममतवमनुवर्तते ||

प्रसंग:
क्या लक्ष्य के लिए चोट खाते रहना उचित है?
अष्टावक्र के अमूल्य वचनों को जीवन में कैसे उतारें?
क्या चोट खाकर हम जाग जाते हैं?